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TrustFinance Global Insights
พ.ค. 05, 2026
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मंगलवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। मध्य पूर्व में नए भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से यह गिरावट आई है। USD/INR जोड़ी 95.4375 के इंट्राडे उच्च स्तर पर पहुंच गई, जो एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
USD/INR जोड़ी में 0.2% की वृद्धि देखी गई और यह 95.2913 पर कारोबार कर रही थी। मुद्रा की अस्थिरता के बावजूद, भारत की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 7.02% पर स्थिर रही, जो देश के वित्तीय बाजारों में मिली-जुली प्रतिक्रिया का संकेत है। मुद्रा का प्रदर्शन वैश्विक कमोडिटी कीमतों से निकटता से जुड़ा हुआ है।
यूबीएस के विश्लेषकों ने बताया है कि भारत की अर्थव्यवस्था तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, क्योंकि देश अपने कच्चे तेल का लगभग 88% आयात करता है। रुपये के लिए मुख्य चुनौती भुगतान संतुलन बनी हुई है। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2027 के अंत तक अपने USD/INR पूर्वानुमान को संशोधित कर 96 कर दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रा को समर्थन देने के लिए 2013 के नीतिगत उपायों पर विचार कर सकता है।
नीति निर्माताओं के लिए मुख्य प्राथमिकता ऐसे उपाय लागू करना होगा जो मुद्रा को स्थिर करने के लिए पूंजी प्रवाह को प्रोत्साहित करें। बाजार आरबीआई की प्रतिक्रिया और वैश्विक तेल बाजारों तथा क्षेत्रीय तनावों में किसी भी आगे के घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखेगा।
प्र: भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर क्यों पहुंचा?
उ: रुपये में गिरावट मुख्य रूप से मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के कारण हुई।
प्र: USD/INR विनिमय दर के लिए नया पूर्वानुमान क्या है?
उ: यूबीएस विश्लेषकों ने वित्तीय वर्ष 2027 के अंत के लिए अपने पूर्वानुमान को 94 के पिछले अनुमान से बढ़ाकर 96 कर दिया है।
स्रोत: Investing.com

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