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TrustFinance Global Insights
फ़र. ०३, २०२६
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भारतीय शेयरों में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ एक व्यापार समझौते की घोषणा के बाद भारी उछाल देखा गया, जो भारतीय निर्यात पर शुल्क कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस खबर ने तुरंत इक्विटी और मुद्रा बाजार दोनों में निवेशकों की भावना को बढ़ावा दिया।
बाजार खुलने पर भारत का निफ्टी 50 बेंचमार्क इंडेक्स 5 प्रतिशत तक उछल गया, जबकि शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 30 में भी 5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। यह सकारात्मक गति भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्कों को पिछले 50 प्रतिशत के उच्च स्तर से घटाकर 18 प्रतिशत करने के समझौते के बाद आई। इन शुल्कों ने पहले निर्यात-केंद्रित क्षेत्रों को प्रभावित किया था।
इस समझौते के जवाब में, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1 प्रतिशत से अधिक मजबूत हुआ। इस समझौते से भारतीय परिसंपत्तियों में नया विदेशी पूंजी आकर्षित होने की उम्मीद है। रिपोर्टों से यह भी संकेत मिलता है कि भारत इस समझौते के तहत अमेरिकी वस्तुओं की अपनी खरीद बढ़ाने और रूसी तेल आयात को कम करने की उम्मीद कर रहा है।
हालांकि बाजार ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, निवेशक समझौते के कार्यान्वयन विवरण पर केंद्रित हैं। इस समझौते को वैश्विक व्यापार तनावों से उत्पन्न हालिया अस्थिरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
प्र: भारतीय शेयरों में उछाल क्यों आया?
उ: यह उछाल अमेरिका के साथ एक नए व्यापार समझौते की सीधी प्रतिक्रिया थी, जो भारतीय निर्यात पर शुल्कों को 50% तक के उच्च स्तर से घटाकर 18% कर देगा।
प्र: भारतीय रुपये का प्रदर्शन कैसा रहा?
उ: घोषणा के बाद भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1% से अधिक मजबूत हुआ, जो सकारात्मक निवेशक उम्मीदों को दर्शाता है।
स्रोत: Investing.com

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