बैंक ऑफ इंग्लैंड ने बड़े बैंकों की निगरानी को द्विवार्षिक चक्र में ढील दी।

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1月 15, 2026

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बैंक ऑफ इंग्लैंड ने बड़े बैंकों की निगरानी को द्विवार्षिक चक्र में ढील दी।

पीआरए दो-वर्षीय पर्यवेक्षी चक्र में स्थानांतरित हुआ

बैंक ऑफ इंग्लैंड के प्रूडेंशियल रेगुलेशन अथॉरिटी (पीआरए) ने अपने पर्यवेक्षी दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है, जिसमें प्रमुख बैंकों के लिए वार्षिक से दो-वर्षीय चक्र में बदलाव किया गया है। इस बदलाव का मतलब है कि औपचारिक समीक्षाएं, जिन्हें आवधिक सारांश बैठकें (Periodic Summary Meetings) कहा जाता है, अब द्विवार्षिक रूप से होंगी।


विनियंत्रण और आर्थिक विकास

यह निर्णय यूके के अधिकारियों द्वारा नियामक बोझ को कम करने और आर्थिक विकास तथा प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयास के अनुरूप है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के डिप्टी गवर्नर सैम वुड्स के अनुसार, इस बदलाव का उद्देश्य परिचालन को अधिक कुशल बनाना और विनियमित फर्मों के लिए बातचीत को सुव्यवस्थित करना है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय आंतरिक था, लेकिन यह लालफीताशाही को कम करने के राजनीतिक दबाव के बीच आया है।


वित्तीय स्थिरता और उद्योग पर प्रभाव

यह कदम बैंक नियमों को आसान बनाने की वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा है। हालांकि, इसने बहस छेड़ दी है, जिसमें बैंक ऑफ इंग्लैंड के कुछ पूर्व अधिकारियों ने चिंता व्यक्त की है कि हालिया विनियंत्रण प्रयास, जैसे कि पूंजी आवश्यकताओं को कम करना, वित्तीय क्षेत्र के लिए जोखिम बढ़ा सकते हैं। पीआरए का कहना है कि यह बदलाव वित्तीय स्थिरता के अपने प्राथमिक उद्देश्य से समझौता किए बिना विकास का समर्थन करता है।


निष्कर्ष और भविष्य की संभावनाएं

द्विवार्षिक समीक्षा चक्र में संक्रमण नियामकों द्वारा आर्थिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और मजबूत वित्तीय निरीक्षण बनाए रखने के बीच संतुलन साधने के कार्य को दर्शाता है। बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता पर दीर्घकालिक प्रभावों की बारीकी से निगरानी की जाएगी क्योंकि यह और अन्य विनियंत्रण उपाय लागू किए जाते हैं।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र: बैंक ऑफ इंग्लैंड अपनी पर्यवेक्षी आवृत्ति क्यों बदल रहा है?

उ: परिचालन दक्षता में सुधार करने, बैंकों के लिए प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और यूके के आर्थिक विकास तथा प्रतिस्पर्धात्मकता के उद्देश्यों का समर्थन करने के लिए।

प्र: पर्यवेक्षी बैठकें अब कितनी बार होंगी?

उ: बड़े बैंकों के लिए औपचारिक आवधिक सारांश बैठकें अब वार्षिक के बजाय हर दो साल में होंगी।


स्रोत: Investing.com

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